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प्रशिक्षण शाला का लक्ष्य

 

पुलिस कर्मियों में प्रशिक्षण के दौरान ही नैतिकता के साथ दक्षता का विकास सुनिश्चित करना ताकि देश के लिए स्वस्थ्य, संवेदनशील, चरित्रवान, कर्तव्यनिष्ठ और सक्षम पुलिस कर्मी तैयार हों.

 

हमारे उद्देश्य - प्रशिक्षण के अंत तक आप...

 

    •     पुलिस के समक्ष आने वाले व्यक्ति की समस्या का सही निवारण करवा सकेंगें ।

 

    •     अपराध नियंत्रण की प्रविधियों का प्रयोग कर सकेगें ।

 

    •     किसी घटना से संबंधित रिपोर्ट को समझकर सही अधिनियम व धाराओं का प्रयोग कर सकेगें ।

 

    •     पुलिस कार्यवाही संबंधी उपयोगी व निर्धारित फाम्र्स को सही तरीके से तैयार कर सकेंगें ।

 

    •     परेड और ड्रिल संबंधी कार्यवाही का उत्कृष्ट प्रर्दशन कर सकेंगें ।

 

    •     अधिक स्वस्थ्य चुस्त दुरुस्त होकर सभी आब्टेकल्स को निर्धारित समय में क्रास कर लेंगें ।

 

    •     पुलिस द्वारा उपयोग में लाये जा रहे हथियारों की पहचान, प्रयोग और फायर कर सकेंगें ।

 

    •     कम्प्यूटर एवं अॅाफिस उपकरणों की पहचान और प्रयोग कर सकेंगें ।

 

    •     पुलिसिंग हेतु प्रयोग होने वाली आधुनिक तकनीकों व प्रविधियों का प्रयोग कर सकेंगें ।

 

    •     पुलिस वाहनों के कलपुर्जो की पहचान कर सकेेंगें और वाहन चला सकेंगें ।

 

    •     न्यायालय के निर्देशों को समझ कर तामील कर सकेगें ।

 

    •     आरक्षक के रूप में अपनी भूमिका का उपयुक्त निर्वहन कर सकेंगे ।

 


नवीन भवन

प्रशिक्षण शाला  रीवा के उन्नयन के लिए लगभग 35 करोड़ रू. की राशि से कई नये भवन जैसे नवीन प्रशासनिक और अकादमिक भवन, होस्टल, आउटडोर ट्रेनिंग काॅम्प्लेक्स, मेगज़ीन, आर्मरी, सिम्यूलेटर हाल, परेड ग्राउंड, स्टेडियम, रनिंग ट्रेक, क्लाइंबिग वाल, फेकल्टी गेस्ट हाउस और 12 आवासगृहों का निर्माण किया गया है ।


उपलब्ध सुविधाए

 

पुलिस प्रशिक्षण शाला रीवा प्रशासनिक सुविधा की दृष्टि से प्रत्येक भवनों का नामकरण किया गया है-
“ विंध्य भवन प्रशिक्षण शाला  रीवा में प्रशासनिक और अकादमिक भवन  है जिसमें  720 की बैठक क्षमता के कुल 12 क्लासरूम्स के साथ एक कांफ्रेंस रूम, एक आडिटोरियम-

 


सांदीपनी

 

    पीटीएस में नवआरक्षकों के लिए एक विशाल छात्रावास सांदीपनी है जिसके अंदर 1100 नव आरक्षकों को एक साथ रहने और खाने की सुविधा उपलब्ध है । साथ ही इसमें मनोरंजन के लिए टेलीवीजन लगाए गए है ।


मैस-

 

    -मैस मे स्वच्छ, पौष्टिक भोजन अत्यंत कम रेट्स में बनाया जाता है । यहा का किचन हाइजीनिक एंड मेकेनाइज्ड है । मैस का संचालन प्रशिक्षणार्थियों की समिति (स्वतंत्र निर्वाचन द्वारा गठित) द्वारा किया जाता है ।


“वज्र“-

 

मेगज़ीन, उपलब्ध है इसके अंदर टेनिंग का एम्यूनेशन और लाकर है ।


एम.टी.-

 

    प्रशिक्षण शाला  में वाहन वर्कशाप उपलब्ध है  जिसके अंदर प्रशिक्षण शाला  में  उपलब्ध वाहनो का उचित रखरखाव किया जाता है ।


परेड ग्राउंड-

 

    , प्रशिक्षण शाला  में 2 परेड ग्राउण्ड, एक स्टेडियम, 400 मी. का रनिंग ट्रेक, एक क्लाइंबिग वाॅल है ।


“वेलफेयर”-

 

     -टी केंटीन है जिसमें प्रशिक्षण शाला के ही कर्मचारियों द्वारा चाय नाश्ता बनाया जाता है जिससे नवआरक्षकों को ताजा तथा उचित मूल्य पर खाद्य सामग्री उपलब्ध हो सके ।


”विश्राम गृह“-

      -फेकल्टी गेस्ट हाउस  है । प्रशिक्षण शाला में नवआरक्षकों के लिए जो विशेष कार्यक्रम चलाए जाते है उसमें पधारे फेकेल्टी के लिए गेस्ट हाउस उपलब्ध है ।  


पुस्तकालय-

 

     , - लाइब्रेरी हैं । इसके अंन्र्तगत 6000 पुस्तकों की एक विशाल वातानुकूलित पुस्तकालय है और साथ ही बाजार से विभिन्न मासिक पत्रिकाओं को भी क्रय किया जाता है  जिससे प्रशिक्षण शाला में पदस्थ शासकीय सेवकों के साथ-नवआरक्षकों के लिये ज्ञानवर्धक होती है । इकाई की लाइब्रेरी में विभिन्न विषयों की लगभग 4000 किताबें हैं जिन्हें नवआरक्षक इशु कराकर पढ़ सकते हैं ।


कम्प्यूटर विंग

 

     -प्रशिक्षण शाला में 02 आधुनिक कम्प्यूटर लैब्स है -

     -कम्प्युटर लेब 60 प्रशिक्षण हेतु

     -सी.सी.टी.एन.एस. ट्रेनिंग लैब 24 कम्प्यूटर सहित ।

 

 

 
”बाहय प्रशिक्षण भवन“-

 

     - आउटडोर ट्रेनिंग कॉम्प्लेक्स में इकाई का कंट्रोल रूम/रोजनामचा है । इस भवन में आधुनिक मशीनों से युक्त जिम और क्राइम सिमुलेशन रूम स्थापित है । निकट ही नयी आर्मरी है ।

 


फायरिंग सिमुलेटर“

     -सटीक निशानेबाजी की ट्रेनिंग के लिये अत्याधुनिक फायरिंग सिमुलेटर है जिसमें एक साथ 10 नवआरक्षक निशानेबाजी का अभ्यास कर सकते है ।


ड्राइविंग सिम्यूलेटर“-

 

    - एक ड्राइविंग सिम्यूलेटर भी प्रशिक्षण शाला में स्थापित किया गया है जिसमें  नवआरक्षकों को वाहन चालन का अभ्यास कराया जाता है जिससे समय, श्रम, एम्यूनीशन और ईंधन की बचत होगी और ज्यादा से ज्यादा अभ्यास होगा । ड्राइविंग के साथ मोटर मेकेनिज्म, रोड सेफ्टी एण्ड ट्रेफिक ड्रिल की भी प्रेक्टिकल ट्रेनिंग इनहाउस ही दी जा सकेगी । वार फेयर और टेक्टिकल ट्रेनिंग के लिये पार्थ सारथी में ही सैंड माडलरूम तैयार किया गया है ।


चिकित्सालय “-

 

    इकाई में एक चिकित्सालय  है जिसमें प्राथमिक चिकित्सा व फिजियोथेरपी की सुविधाएं उपलब्ध है साथ ही समय-समय पर नवआरक्षकों को स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी भी दी जाती है । वायरल जनित बीमारियों  से बचाव के लिए डा. श्री विक्रमादित्य द्विवेदी द्वारा विभिन्न तरीकों से अवगत कराया जाता है ।प्रशिक्षण शाला के इस चिकित्सालय में बेड की भी व्यवस्था है जो साधारण बीमारी में नव आरक्षकों के इलाज के लिए उपयोगी है । यूनिट चिकित्सक के अतिरिक्त आरक्षक श्री विजय द्विवेदी तथा वाटरमैन विजय तिवारी जी के द्वारा सराहनीय कार्य किया जा रहा है ।

 

    साथ ही इकाई में अन्य सुविधाओं के अन्र्तगत गार्डनर, बारबर, वाशरमैन, शू-मेकर, इलेक्ट्रिशियन, प्लंबर, मेशन और स्वीपर्स हैं और साथ ही  एक जिम्नेशियम, फ्लोर स्क्रबर मशीन, डिश वाशर मशीन, वाटर प्यूरीफिकेशन की सुविधायें भी हैं ।
    साथ ही प्रशिक्षण शाला में  विशेष आॅब्स्टेकल कोर्स डिजाइन किया गया है । प्रशिक्षणार्थियों को 07 दिन के जंगल कैंप में भी फील्ड क्राफ्ट टेक्टिक्स का अभ्यास कराया जाता है ।  प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिये प्राथमिक चिकित्सा और आपदा प्रबंधन का नियमित अभ्यास कराया जाता है।


प्रशिक्षण संसाधन

 

    •     प्रशिक्षक

 

    •     मल्टीमीडिया प्रोजेक्टर,

 

    •     इंटरएक्टिव व्हाइट बोर्ड और आडियो सिस्टम,

 

    •     वातानूलित आधुनिक कान्फ्रंस हाल

 

    •     वातानूलित कम्प्यूटर लैब  एल.सी.डी. प्रोजेक्टरयुक्त।

 

    •     फायरिंग सिमूलेटर

 

    •     ड्रायविंग सिमुलेटर

 

    •     बयोमेट्रिक मशीन द्वारा अटेन्डेन्स

 

    •     साफ्टवेयर  द्वारा प्रशिक्षण

 

    •     सी.डी. लाईब्रेरी

 

    •     टोटल 120 कम्प्यूटर उपलब्ध हैं

 

    •     टी. ओ. टी. ट्रेन्ड प्रशिक्षण

 

    •     सी.सी.टी.एन.एस. प्रशिक्षण

 

    •     टी.ओ.टी. ट्रैंड प्रशिक्षण गण

 

    •     सी.डी. लाइबे्ररी

 

    •     क्राइम सीन साफ्टवेयर

 

 

प्रस्तावित योजना:-

 

अकादमिक भवन को वाई-फाई सुविधा से लैस बनाये जाने की योजना है । शीघ्र ही प्रत्येक नवआरक्षक की गतिविधियों और उपलब्धियों का लेखाजोखा रखने के लिये इन्हें आर.एफ. टैग दिये जाने की योजना है।